कॉमेडी फिल्म ‘हाउसफुल’ के रिलीज के 16 साल पूरे होने के मौके पर एक चौंकाने वाला किस्सा सामने आया है। फिल्म की मुख्य अभिनेत्री लारा दत्ता ने शूटिंग से जुड़ा ऐसा अनुभव साझा किया है, जिसने इस फिल्म के पीछे छिपी मेहनत और समर्पण को उजागर कर दिया। उन्होंने बताया कि फिल्म की सफलता के पीछे कलाकारों की कड़ी मेहनत थी, जिसमें दीपिका पादुकोण का योगदान बेहद खास रहा।
शूटिंग के दौरान मलेरिया से जूझ रही थीं दीपिका
एक इंटरव्यू में लारा दत्ता ने बताया कि ‘हाउसफुल’ की शूटिंग के दौरान दीपिका पादुकोण मलेरिया से पीड़ित थीं। उनकी हालत इतनी खराब थी कि उन्हें डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया था और लगातार दवाइयां दी जा रही थीं। लारा के मुताबिक, दीपिका को रातभर तेज बुखार रहता था और वे शारीरिक रूप से काफी कमजोर हो चुकी थीं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने काम से समझौता नहीं किया।
बीमारी के बावजूद प्रोफेशनलिज्म में नहीं आई कमी
लारा दत्ता ने दीपिका की तारीफ करते हुए कहा कि मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी शरीर को पूरी तरह तोड़ देती है, लेकिन दीपिका ने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने बताया कि तय शेड्यूल और बड़ी स्टारकास्ट के चलते शूटिंग रोकना संभव नहीं था। ऐसे में दीपिका हर सुबह सेट पर पहुंचती थीं, जहां उनके चेहरे पर थकान साफ नजर आती थी, लेकिन कैमरा ऑन होते ही उनके अभिनय में कोई कमी नहीं दिखती थी। लारा ने उन्हें एक सच्चा प्रोफेशनल बताया।
2010 में रिलीज हुई फिल्म ने मचाई थी धूम
साल 2010 में रिलीज हुई ‘हाउसफुल’ एक मल्टीस्टारर कॉमेडी फिल्म थी, जिसमें अक्षय कुमार, रितेश देशमुख, दीपिका पादुकोण, लारा दत्ता, बोमन ईरानी और अर्जुन रामपाल जैसे कलाकार नजर आए थे। करीब 45 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया और दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।
कॉमेडी फ्रैंचाइजी की मजबूत नींव बनी ‘हाउसफुल’
इस फिल्म की सफलता ने बॉलीवुड की सबसे लोकप्रिय कॉमेडी फ्रैंचाइजी में से एक की शुरुआत की। ‘हाउसफुल’ के बाद इसके कई सीक्वल बने, जिन्होंने दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। 2010 से शुरू हुआ यह सफर आगे भी जारी रहा और समय-समय पर नई कहानियों के साथ दर्शकों को हंसाता रहा।
दीपिका के समर्पण ने बनाई अलग पहचान
लारा दत्ता ने यह भी बताया कि दीपिका पादुकोण का स्वभाव भले ही थोड़ा रिजर्व हो, लेकिन उनके काम के प्रति समर्पण ने इस फिल्म और पूरी फ्रैंचाइजी को खास बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह किस्सा एक बार फिर दिखाता है कि पर्दे के पीछे कलाकार किस तरह कठिन परिस्थितियों में भी अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करते हैं।
